संदेश

कुदरत का करिश्मा Wonder of Nechure

अद्भुत रहस्मयी दुर्लभ जानी अनजानी जगह यहां पत्थरों से आती है अजीबो-गरीब अवाज, अद्भुत है इस पहाड़ का इतिहास #Wonders_of_ Nature इस बार मैं आपको एक ऐसी अनूठी और आश्चर्यजनक जगह के बारे में बता रहा हूं जो वंडर ऑफ नेचर है। यह जगह है कावड़िया पहाड़। यह एक ऐसी प्राकृतिक जगह है जो भूगर्भीय हलचलों से अपने आप बन गई है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां ज़मीन से 50-60 फीट ऊंची पत्थरों की लंबी-लंबी चट्टानें हैं जो किसी बड़ी छड़ों का आभास देती हैं। ये लगभग एक जैसे शेप और साइज़ में हैं। ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी फैक्टरी में बनाकर यहां लगा दिया गया हो। इन्होंने एक छोटे पहाड़ का आकार ग्रहण कर लिया है। इसे ही *कावड़िया पहाड़* कहते हैं। ये चट्टानें या मोटी छड़ें दूर से लोहे की बनी दिखाई देती हैं लेकिन ये असल मे पत्थरों, मिट्टी और खनिजों से मिलकर बनी हैं। यह हाथ लगाकर देखने मे बिल्कुल पत्थर जैसी दिखती है। इन्हें किसी छोटे पत्थर या धातु से बजाने पर इनमें से लोहे की रॉड से निकलने वाली जैसी आवाज़ सुनाई देती है। यहां एक गुफानुमा सुंदर स्थान भी है। कावड़िया पहाड़ विश्वभर में दुर्लभ है। यहां आने वाले पर...

ढोला - मारू की प्रेम कहानी

चित्र
आठ कुआँ, नौ बावडी, सोलह सौ पनिहार जिनके आवत जात से, गढ़ में रहत बहार। सोरठियो दूहो भलो, भलि मरवणरी बात।जोवन छाई धण भली, तारांछाई रात।। राजस्थान की मिट्टी वीरो के शौर्य और बलिदान के लिए मशहूर है। यहां के योद्धाओं की गाथाएं आज भी बड़े गर्व से सुनाई जाती हैं। केवल वीरों की गाथाएं नहीं हैं बल्कि उनकी कई की वसुंधरा पर कई प्रेम कहानियां भी हैं, जो आज भी बहुत प्रचलित हैं। यहां कभी एक वेश्या ने अपने प्रेम के लिए पूरी सल्तनत को चुनौती दी तो कभी एक दासी के रूप के आगे नतमस्तक हो गया राजा। लेकिन आज हम आपको बता रहे है राजस्थान की सबसे चर्चित प्रेम कहानी जो इतिहास में ‘ढोला-मारू’ की प्रेम कहानी के नाम से विख्यात है। आज भी इस प्रेमी जोड़े का जिक्र यहां के लोकगीतों में होता है। नरवर के राजा नल के तीन साल के पुत्र साल्हकुमार का विवाह बचपन में जांगलू देश (बीकानेर) के पूंगल नामक ठिकाने के स्वामी पंवार राजा पिंगल की पुत्री से हुआ था। चूंकि दोनों अभी बहुत छोटे थे इसलिए दुल्हन को ससुराल नहीं ले जाया गया। बड़े होने पर राजकुमार की एक और शादी कर दी गई। अब तक राजकुमार अपनी बचपन में हुई शादी के बारे में...

मध्यप्रदेश_ नलखेडा माँ बगलामुखी का प्राचीन महाभारत कालीन मंदिर

चित्र
#मध्यप्रदेश_ नलखेडा माँ बगलामुखी का प्राचीन महाभारत कालीन  मंदिर ''ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ॐ स्वाहा।'' प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक है बगलामुखी। माँ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। उनमें से एक है नलखेड़ा (म.प्र.) में। तो आइये हम अपको ले चलते हैं माँ बगलामुखी के मंदिर। भारत में माँ बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व हैl मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का यह मंदिर तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहाँ देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं। इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमा...