कुदरत का करिश्मा Wonder of Nechure

अद्भुत रहस्मयी दुर्लभ जानी अनजानी जगह

यहां पत्थरों से आती है अजीबो-गरीब अवाज, अद्भुत है इस पहाड़ का इतिहास

#Wonders_of_ Nature

इस बार मैं आपको एक ऐसी अनूठी और आश्चर्यजनक जगह के बारे में बता रहा हूं जो वंडर ऑफ नेचर है। यह जगह है कावड़िया पहाड़। यह एक ऐसी प्राकृतिक जगह है जो भूगर्भीय हलचलों से अपने आप बन गई है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां ज़मीन से 50-60 फीट ऊंची पत्थरों की लंबी-लंबी चट्टानें हैं जो किसी बड़ी छड़ों का आभास देती हैं। ये लगभग एक जैसे शेप और साइज़ में हैं। ऐसा लगता है जैसे इन्हें किसी फैक्टरी में बनाकर यहां लगा दिया गया हो। इन्होंने एक छोटे पहाड़ का आकार ग्रहण कर लिया है। इसे ही *कावड़िया पहाड़* कहते हैं।

ये चट्टानें या मोटी छड़ें दूर से लोहे की बनी दिखाई देती हैं लेकिन ये असल मे पत्थरों, मिट्टी और खनिजों से मिलकर बनी हैं। यह हाथ लगाकर देखने मे बिल्कुल पत्थर जैसी दिखती है। इन्हें किसी छोटे पत्थर या धातु से बजाने पर इनमें से लोहे की रॉड से निकलने वाली जैसी आवाज़ सुनाई देती है। यहां एक गुफानुमा सुंदर स्थान भी है। कावड़िया पहाड़ विश्वभर में दुर्लभ है। यहां आने वाले पर्यटक इस विचित्र पहाड़ की खासियत देखकर दंग रह जाते हैं। करीब ढाई हजार मीटर लंबे कावड़िया पहाड़ की सात चोटियां 5किमी में फैली है। अद्भुत पत्थरों का यह दर्शनीय नजारा नीचे से ही शुरू हो जाता है। पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के लिए कावड़िया पहाड़ के पत्थरों से बना सीढ़ीनुमा रास्ता बहुत ही सुंदर है।।

कावड़िया के अलावा आसपास के किसी भी पत्थर से इस तरह की आवाज नहीं आती है। इस पहाड़ की दूसरी खासियत ये है कि यह पहाड़ एक ऐसा लगता है जैसे किसी ने एक के ऊपर एक पत्थर रखकर इसे तैयार किया हो। यहां जो पत्थर हैं वे छः और अष्ट कोणीय तथा करीब 8 फीट के है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने 25 से ज्यादा बार इसे जांचा है। वे इसे भूगर्भीय घटना बताते हैं। उनके अनुसार ये पत्थर बैसाल्ट के पत्थर हैं। ऐसे पत्थर ऑस्ट्रिया में एक पहाड़ पर भी हैं, लेकिन बहुत छोटी पहाड़ी है। इतना विशाल क्षेत्रफल का सिर्फ कावड़िया पहाड़ ही है, जो दुर्लभ है।

ये है किवदंती..
स्थानीय ओर आसपास के इलाके से किवदंती है कि महाभारतकाल में भीम ने एक बार नर्मदा नदी से शादी का प्रस्ताव रखा था, तब नर्मदा ने शर्त रखी थी कि यदि आपने मुर्गे के बांग देने से पहले मेरे प्रवाह को रोक लिया तो मैं आपसे विवाह करूंगी। तब भीम ने रातभर में नर्मदा के प्रवाह को रोकने के लिए इस पहाड़ी का निर्माण शुरू किया था, लेकिन मुर्गे की बांग से पहले पहाड़ पूरा नहीं हो सका। तब से ये पत्थर ऐसे ही जमे हैं।

चमत्कारी हैं महाभारतकालीन ये पत्थर.

वैज्ञानिक तथ्य- यह पत्थर नुमा आकृति ज्वालामुखी के लावा से निर्मित है।
वैज्ञानिक भले ही कुछ ही कहें लेकिन ग्रामीण इस पहाड़ को चमत्कारी मानते हैं। अंग्रेजों ने इस पहाड़ के पत्थर ले जाने के लिए यहां रेलवे लाइन डलवाई थी, लेकिन वे एक शिला भी नहीं उठा सके। अभी भी यदि कोई यहां के पत्थरों को उठाकर ले जाने की कोशिश करता है तो पत्थर ले जा नहीं पाता। बुजुर्गों की माने तो ये पत्थर महाभारतकालीन हैं और उसी समय से इसी प्रकार जमे हैं।

वही कुछ लोगो का मानना ये है की महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ये चट्टान लेकर आये थे और यहाँ जमाये थे, उनका मकसद शायद इनसे महल बनाने का था|

कैसे पहुंचे-

देवास मप्र. से बागली, पीपरी होकर दूरी 117 किमी।
सोनकच्छ से दूरी 110किमी।
कन्नौद से सतवास, कांटाफोड़ होकर दूरी 64 किमी।
खातेगांव से सतवास, कांटाफोड़ पुंजापुरा होकर 104 किमी।

इंदौर से 75 किमी की दुरी पर है, इंदौर से उदयनगर होते हुए पोटला से पिपरी से 1 किमी जंगल में आता है कावड़िया पहाड़|

इंदौर जिले से लगभ 75 कीलोमीटर दूर देवास जिले के अंतर्गत बागली तहसील के उदयपुरा गांव के पास सीता वाटिका से लगभग 10 किमी उत्तर में वनप्रदेश के रास्ते पोटलागांव से 1 किमी की दूरी पर कावड़िया पहाड़ है। 

साभार - YouTube/ Google/न्यूज चेनल/ Facbook खातेगांव मित्र एवं फोटो मेप से 

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